महर्षि वाल्मीकि का मूल नाम रात्रिक था। वे एक डाकू थे जो ऋषि नारद के उपदेश से तपस्वी बने।
महर्षि वाल्मीकि को आदि कवि माना जाता है। उन्होंने रामायण की रचना की।
उत्पत्ति: एक डाकू से महर्षि
तपस्वी, ज्ञानी, कवि परंपरा के प्रवर्तक
तपस्वी, ज्ञानी, कवि परंपरा के प्रवर्तक
वाल्मीकि जयंती
रामायण
महर्षि वाल्मीकि का मूल नाम रात्रिक था। वे एक डाकू थे जो ऋषि नारद के उपदेश से तपस्वी बने।
साहित्य का प्रतीक
ॐ वाल्मीकये नमः
वाल्मीकि को नमन है
महर्षि वाल्मीकि को आदि कवि माना जाता है। उनकी रचना रामायण विश्व साहित्य की अमूल्य धरोहर है।
रिपों, हिमाचल प्रदेश
वाल्मीकि ऋषि का आश्रम
वाल्मीकि ने संस्कृत साहित्य की नींव रखी। उनका 'तापसी' पद्धति में रामायण रचने का श्रेय उन्हें जाता है।
वाल्मीकि ने धर्म, कर्तव्य और आदर्श जीवन के मार्ग दिखाए। उनकी कविता में जीवन के गहन सत्य हैं।
को न्वन्यः प्रियमात्मानं यः प्रियः स्यादिति ध्यवः।
जो अपने आप से प्रेम करता है, वही सबसे प्रिय है।
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